तेरी बनाई इस दुनिया में, बाबा लोग तुझे ही बनाते हैं, यह कैसा न्याय है? बाबा, तू इस सृष्टि का निर्माता है, सबका लेखा-जोखा रखने वाला है, तो फिर किसी के पिछले जन्म में किए गए पाप और पुण्य का फल दूसरे जन्म में उधार क्यों रखता है?
अगर मैंने पिछले जन्म में किसी का बुरा किया, किसी को दुख पहुँचाया, किसी का धन खाया या कोई घोर पाप किया, तो उसकी सज़ा दूसरे जन्म में क्यों? जबकि मुझे तो यह भी नहीं पता कि मुझे पुनर्जन्म मिला है या नहीं। कहते हैं कि 84 लाख योनियों के बाद फिर मनुष्य जीवन मिलता है, लेकिन मुझे तो कुछ याद ही नहीं कि मैंने कौन से पाप किए और कौन से पुण्य, जिनकी सज़ा या फल इस जन्म में मिल रहे हैं।
यह बही-खाता मुझे समझ नहीं आया। तू तो सबसे बड़ा खिलाड़ी है, फिर तेरे बनाए इस खाते में यह "बैलेंस कैरी फ़ॉरवर्ड" क्यों? मौके पर ही हिसाब-किताब क्यों नहीं? पाप किया तो सज़ा भी अभी मिले और पुण्य किया तो फल भी अभी मिले। सीधा और स्पष्ट हिसाब क्यों नहीं?
अगर यही व्यवस्था रही तो लोग सोचेंगे कि सज़ा तो अगले जन्म में मिलेगी, तो अभी क्यों चिंता करें? 84 लाख योनियों के बाद की बात कौन जानता है, इसलिए अभी तो जी भरकर आनंद ले लो। लेकिन किसी को इतना भी मत सताना कि लोगों का तुझ पर से विश्वास ही उठ जाए।
ज़िंदगी भर इंसान मेहनत करके और ईमानदारी से भी अपना परिवार नहीं पाल पाता, और जब लगता है कि अब चैन से जीना चाहिए, तब पिछले जन्म के पाप सामने आ जाते हैं—कभी बीमारी बनकर, कभी कर्ज़ बनकर, तो कभी अपनों के धोखे के रूप में।
यह गलत हिसाब क्यों? इतनी बड़ी गड़बड़ी क्यों?
बाबा, मेरे इन सवालों का कोई न कोई जवाब तो होगा।