Hello dosto, ज़रा मुस्कुरा तो लो,
ज़िंदगी भाग रही है — कभी बैठ भी लो।
कभी पेड़ की छाँव में दो मिनट काटो,
कभी खामोशी में भी बातें बना लो।
कब तक मोबाइल में लगे रहोगे जनाब?
कभी ज़िंदगी को भी तो दो कोई जवाब।
वो जो बचपन में बबलगम चबाते थे,
आज स्ट्रेस को जैसे चाय में घोल जाते हैं।
कभी बारिश में भीगना पागलपन था,
अब छाता भी ले जाते हैं टाइम देखकर।
कभी बिना बजह हँसते थे गलियों में,
अब मीम्स देखकर भी बस "हूं" निकलता है।
दोस्तों, ज़िंदगी कोई टू-डू लिस्ट नहीं है,
ये तो पकोड़े जैसी चीज़ है – गरम हो तो ही सही है। 😄
थोड़ा तले हुए पल, थोड़ी हँसी की चटनी,
और ऊपर से रिश्तों की मीठी सी पतली चाशनी।
तो चलो आज बिना वजह मुस्कुराएं,
पुराने दोस्तों को अचानक याद दिलाएं।
Hello dosto, ज़िंदगी सिर्फ टेंशन नहीं,
ये तो हर दिन की एक प्यारी सी मस्ती है कहीं।
تیرے خیالوں میں کھویا ہوں میں، ہر شام کو تیری یاد آتی ہے۔ کیا کہوں، کیسے بتاؤں، یہ دل کی کہانی۔ راتوں کی تنہائی میں تیری آواز سنائی دیتی ہے، جیسے چاند کی روشنی میں تیرا سایہ۔