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बहुत समय पहले एक हरा-भरा जंगल था। वहाँ की हर सुबह पंछियों की चहचहाहट से शुरू होती और शामें चाँदनी की ठंडी रौशनी में ढल जातीं। जंगल इतना खूबसूरत था कि देखने वाला ठहरकर उसकी साँसों को भी सुन सकता था।
इस जंगल में जानवरों का एक छोटा परिवार रहता था – हिरण, खरगोश, बंदर, मोर और कई पक्षी। सब अपने-अपने तरीके से जंगल को और भी खास बना देते। हिरण घास चरते हुए नदियों के किनारे दौड़ लगाते, खरगोश छोटे-छोटे गड्ढों में खेलते, और मोर जब बारिश आती तो पंख फैलाकर नाच उठते।
लेकिन इस जंगल का सबसे प्यारा रहस्य था – एक विशाल बरगद का पेड़। कहते थे कि इस पेड़ में जादू था। जब भी कोई जानवर दुखी होता, वह उसके पास जाकर बैठता और जैसे ही ठंडी हवा उसकी पत्तियों को हिलाती, मन हल्का हो जाता।
एक दिन जंगल में आग लग गई। सब जीव घबराकर इधर-उधर भागने लगे। तभी उस बरगद के पेड़ की शाखाएँ जैसे हवा से बातें करने लगीं और अचानक काले बादल आकर बारिश बरसाने लगे। बारिश ने आग बुझा दी और जंगल फिर से हरा-भरा हो गया।
उस दिन सभी जानवरों ने सीखा कि असली ताकत मिलकर रहने में है और जंगल की खूबसूरती उसकी एकता में छिपी है। तभी से सभी जीव मिलजुलकर रहते और उस बरगद के पेड़ को अपना रक्षक मानते।
आज भी जब कोई उस जंगल से गुज़रता है, तो हवा मानो कहती है – "यहाँ प्रकृति सिर्फ जीवों का घर नहीं, बल्कि दोस्ती और प्यार की धड़कन है।"
एक सुंदर सुबह थी जब पहाड़ों से धुंध उतर रही थी। चिड़ियों की मधुर आवाज़ें हवा में गूंज रही थीं और झरने का पानी मोतियों की तरह चमक रहा था। प्रकृति की इस खूबसूरती को देखकर मन प्रसन्न हो गया।