रात के 12 बजे थे। बारिश तेज़ हो रही थी और बिजली बीच-बीच में चमक रही थी। आरव एक पुराने होटल में रुका था, जो सुनसान सड़क पर अकेला खड़ा था। होटल के मालिक ने उसे चाबी देते समय अजीब नज़रों से देखा और कहा –
“कमरा नंबर 13… कभी मत खोलना।”
आरव ने हँसते हुए कहा, “क्यों? वहाँ भूत है क्या?”
मालिक ने कुछ नहीं कहा, बस डर से उसकी तरफ देखा और चला गया।
रात गहराने लगी। आरव अपने कमरे में सोने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दीवार के पीछे से किसी के रोने की आवाज़ आ रही थी। पहले उसने सोचा कोई और गेस्ट होगा, लेकिन जब आवाज़ तेज़ होने लगी, तो उसका दिल धड़कने लगा।
कुतूहल उसे खा रहा था। वो उठकर उस दरवाज़े के सामने पहुँचा, जिस पर लिखा था – 13।
दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ था। अंदर से ठंडी हवा और सड़े हुए मांस जैसी बदबू आ रही थी।
वो धीरे-धीरे अंदर गया। कमरा बिल्कुल खाली था… सिवाय एक पुराने झूले के, जो अपने आप हिल रहा था।
अचानक दरवाज़ा बंद हो गया। आरव ने पीछे मुड़कर देखा – दीवारों पर खून से लिखा था:
“तुम्हारा नाम अब हमारी लिस्ट में है।”
झूले पर बैठी एक औरत का सड़ा हुआ चेहरा उसकी तरफ मुस्कुरा रहा था। उसकी आँखें गड्ढों जैसी खाली थीं।
आरव चीखा… लेकिन उसकी आवाज़ बाहर नहीं गई।
अगली सुबह होटल के मालिक ने कमरा खोला। झूला हिल रहा था… और उस पर बैठा था आरव। लेकिन उसका चेहरा पूरी तरह काला पड़ चुका था।
कमरा नंबर 13… फिर से इंतज़ार कर रहा था अगले मेहमान का।
धीरे धीरे चलते हुए एक नई सोच जन्म ले रही है, एक ऐसी सोच जो आपके जीवन को नया रूप दे सकती है। आज की यह कहानी आपको एक नए सफर पर ले जाएगी, जहां हर कदम एक नया सबक सिखाता है।