दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपने साथ कई रहस्य समेटे हुए हैं... लेकिन रूस के उरल माउंटेंस में एक ऐसी जगह है जिसे लोकल लोग खोलत स्याखल कहते हैं। इसका मतलब है—मौत का पहाड़। फरवरी १९५९। ९ नौजवान, जो ट्रेकिंग में माहिर थे, इस पहाड़ पर निकलते हैं। उन्हें लगा था कि ये सिर्फ एक एडवेंचर है... पर उन्हें नहीं पता था कि वो मौत के एक ऐसे खेल में फंसने वाले हैं जिसका जवाब आज ६० साल बाद भी किसी के पास नहीं है। जब उनकी लाशें मिलीं, तो नजारा इतना खौफनाक था कि देखने वालों की रूह कांप गई। आज के इस वीडियो में हम द ड्याटलोव्ह पास इंसिडेंट की एक-एक डिटेल को खोलेंगे। शुरू करते हैं शिवम एपेक्स पर।
इस ग्रुप का लीडर था इगोर ड्याटलोव्ह, जिनके नाम पर बाद में इस जगह का नाम ड्याटलोव्ह पास रखा गया। उनके साथ ७ मर्द और २ महिलाएं थीं। ये सभी लोग प्रोफेशनल हाइकर्स थे। उनका मकसद था ओतोर्टेन माउंटेन तक पहुंचना, जो एक बेहद मुश्किल रास्ता था। २७ जनवरी को उनका सफर शुरू हुआ। शुरुआत में सब कुछ ठीक था। उनकी डायरी और फोटोज से पता चलता है कि वो लोग खुश थे। लेकिन १ फरवरी को मौसम खराब हो गया और भटक कर वो लोग खोलत स्याखल यानी मौत के पहाड़ पर पहुंच गए। उन्होंने वहीं अपना टेंट लगाने का फैसला किया। वो उनकी जिंदगी की आखिरी रात थी।
जब काफी दिनों तक ग्रुप का कोई संदेश नहीं आया, तो एक सर्च पार्टी भेजी गई। २६ फरवरी को उन्हें उनका टेंट मिला। लेकिन टेंट की हालत देख कर सब दंग रह गए। टेंट अंदर से चाकू से फाड़ा गया था। सारा सामान, जूते और कपड़े अंदर ही पड़े थे। पहाड़ी पर नंगे पैरों के निशान मिले... जो दिखाते थे कि वो लोग जान बचाने के लिए भागे थे। थोड़ी दूर पर दो लाशें मिलीं—सिर्फ अंडरवियर में, बिना जूतों के, माइनस ३० डिग्री की ठंड में। उनके हाथ जले हुए थे। जैसे वो किसी आग के पास होने की कोशिश कर रहे हों या पेड़ पर चढ़ रहे हों।
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती। कुछ महीनों बाद बाकी ४ लाशें एक गहरी खाई में मिलीं। इनकी हालत पहली लाशों से भी बदतर थी। दुबिनीना की जीभ गायब थी। उसके मुंह का हिस्सा और आंखें भी नहीं थीं। थिबॉ-ब्रिग्नोल की खोपड़ी बुरी तरह से टूटी हुई थी। सेम्योन और दुबिनीना की छाती ऐसी टूटी थी जैसे किसी कार ने उन्हें १०० की स्पीड से टक्कर मारी हो। सबसे अजीब बात? उनके शरीर पर बाहर से कोई चोट नहीं थी, लेकिन अंदर की हड्डियां चूर-चूर थीं। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कहा कि ये किसी इंसान के बस की बात नहीं है।
अब सवाल ये है कि उन्हें किसने मारा? इस पर कई थ्योरीज़ हैं। एवलंच यानी बर्फ का तूफान। कहा जाता है कि बर्फ गिरी और वो डर गए। पर उनकी चोट बर्फ गिरने जैसी नहीं थी। मिलिट्री एक्सपेरिमेंट। उनके कपड़ों पर हाई रेडिएशन मिला। क्या रूस वहां कोई सीक्रेट वेपन टेस्ट कर रहा था? द इनफ्रासाउंड। एक ऐसी साउंड जो इंसान को पागल कर देती है और उसे भागने पर मजबूर करती है। द येती। लोकल लोग मानते हैं कि वहां एक शैतानी ताकत रहती है जो डराकर मार देती है।
दोस्तों, ड्याटलोव्ह पास आज भी एक अनसुझा रहस्य है। २०२० में रूसी ऑथॉरिटीज ने कहा कि ये एक एवलंच था, पर कई लोग इसे आज भी नहीं मानते। आपको क्या लगता है? क्या वो कोई सीक्रेट एक्सपेरिमेंट था या कुछ और? कमेंट में बताना मत भूलना। अगर ये वीडियो आपको पसंद आई तो शिवम एपेक्स को सब्सक्राइब करें। मिलते हैं अगले रहस्य के साथ। तब तक के लिए... सावधान रहें।
आज मैं आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताऊंगा जहां सूरज ढलने के बाद सन्नाटा पसर जाता है। लोग कहते हैं कि वहां की पुरानी हवेली में आज भी किसी के चलने की आहट सुनाई देती है।