एक दिन एक लोमड़ी बहुत भूखी थी। वह खाने की तलाश में जंगल में इधर-उधर घूम रही थी। तभी उसकी नजर एक सुंदर बेल पर लटके हुए पके अंगूरों की ओर गई। अंगूर देखने में बहुत स्वादिष्ट और रसीले लग रहे थे। लोमड़ी ने सोचा, “अगर मुझे ये अंगूर खाने को मिल जाएं तो मेरी भूख मिट जाएगी।”लोमड़ी ने उन अंगूरों तक पहुँचने के लिए उछल कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की। वह बार-बार कूदती रही, लेकिन अंगूर बहुत ऊँचाई पर थे और उसकी पहुँच से बाहर थे। लोमड़ी ने कई बार प्रयास किया, लेकिन उसका कोई तरीका काम नहीं आया।काफी कोशिश करने के बाद, लोमड़ी थक गई। उसे समझ आ गया कि वह अंगूर कभी नहीं पकड़ पाएगी। फिर उसने खुद को तसल्ली देने के लिए कहा, “ये अंगूर तो वैसे भी खट्टे होंगे। मुझे इनका स्वाद पसंद नहीं आता।” यह कहकर लोमड़ी वहाँ से चली गई।सीखइस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जब हम कोई चीज़ हासिल नहीं कर पाते, तो अक्सर हम उसे बुरा या बेकार बताने लगते हैं।
زندگی کی راہ پر چلتے ہوئے کبھی تھکنا نہیں، ہر موڑ پر نئی امید ملتی ہے۔ وقت کی قدر کرو، کیونکہ یہ پل بیت جائے تو واپس نہیں آتا۔ اپنی طاقت پر یقین رکھو اور آگے بڑھتے رہو۔