[संगीत] साहिबा आए घर काहे ना ऐसे तो सताए ना देखूं तुझको चैन आता है साहिबा नींदेवींदे आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही ख्याल दिन रहन आता साहिबा समंदर मेरी आंखों में रह गए हम आते-आते जाना तेरी यादों में रह गए ये पलकें गवाही है हम रातों में रह गए जो वादे किए सारे बस बातों में रह गए बातों बातों में ही ख्वाबों ख्वाबों में ही मेरे करीब है तू तेरी तलब मुझको तेरी तलब जाना हो तो कभी रूबरू शोर शराबा बाबा जो सीने में है मेरे कैसे बयां मैं करूं हाल जो मेरा है मैं किसको बताऊं मेरे साहिबा दिल ना के आएगा थोड़ा तो संभालो नाजुक है ये टूट जाता है साहिबा नींद नींद आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही ख्याल दिन रहना आता है [संगीत] [संगीत] कैसी भला शब होगी वो संग जो तेरे ढलती है दिल को कोई ख्वाहिश नहीं तेरी कमी खलती है आरामना अब आंखों को ख्वाब भी ना बदलती है दिल को कोई ख्वाहिश नहीं तेरी कमी जाना हलती है साहिबा तू ही मेरा आईना हाथों में भी मेरे हाथ तेरा ही नसीब आता है साहिबा नींद भी आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही ख्याल दिन रहना आता साहिबा नींद भी आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही ख्याल दिन रहना चाह [संगीत]
کیا کہوں میں تمہیں، یہ دل کی دنیا میں خیالوں کے سفر ہیں۔ ہر راہ پہ تیری یاد کے نشان ملتے ہیں، ہر موڑ پہ تیرے خواب کی چھاؤں ہے۔ کہاں ڈھونڈوں تجھے، کہاں پاؤں تجھے۔