दोस्तों, कहते हैं कि कुछ स्कूलों में ऐसी जगहें होती हैं जहाँ जाने से हर कोई डरता है। आज की कहानी है एक ऐसे स्कूल की... जहाँ एक पुराना लॉकर हर साल एक बच्चे को अपने अंदर बुलाता था।
15 साल का आर्यन अपने पापा के ट्रांसफर की वजह से नए शहर में आया था। उसका एडमिशन शहर के सबसे पुराने स्कूल में हुआ। आर्यन शांत स्वभाव का था। वह किसी से जल्दी दोस्ती नहीं करता था। इसी वजह से क्लास के कुछ लड़के उसे रोज़ परेशान करते थे। कभी उसका बैग छिपा देते, कभी उसका टिफिन फेंक देते।
लंच ब्रेक में सबसे दूर रहने के लिए आर्यन तीसरी मंज़िल के पुराने लॉकर रूम में जाकर बैठने लगा। वहाँ सालों से कोई नहीं आता था।
एक दिन जब वह अकेला बैठा था...
धड़ाम!
कमरे का आखिरी लॉकर अपने आप खुल गया।
आर्यन डर गया। उसने सोचा शायद पुराना होने की वजह से खुल गया होगा।
लेकिन तभी...
अंदर से किसी बच्चे की धीमी आवाज़ आई...
"मेरा बैग... मुझे वापस चाहिए..."
आर्यन ने काँपते हुए अंदर देखा।
अंदर सिर्फ़ अंधेरा था।
उसी समय एक बर्फ जैसी ठंडी हथेली ने उसका हाथ पकड़ लिया।
आर्यन ज़ोर से चिल्लाया और भागकर अपनी क्लास में पहुँच गया।
उस रात उसे सपने में वही लॉकर दिखाई दिया।
उसके अंदर एक स्कूल यूनिफॉर्म पहना लड़का खड़ा था। उसकी आँखें पूरी काली थीं।
वह बस एक ही बात कह रहा था...
"मेरा बैग वापस कर दो..."
अगले दिन स्कूल में आर्यन जहाँ भी जाता, उसे वही लड़का दिखाई देता। कभी खिड़की के शीशे में... कभी पानी की बोतल के प्रतिबिंब में... लेकिन जैसे ही वह पीछे मुड़कर देखता, वहाँ कोई नहीं होता।
धीरे-धीरे आर्यन का व्यवहार बदलने लगा।
वह क्लास में अकेले किसी से बातें करने लगा।
टीचर ने पूछा, "तुम किससे बात कर रहे हो?"
आर्यन बोला...
"मैम... आपको वो लड़का नहीं दिख रहा?"
पूरी क्लास हँसने लगी।
लेकिन तभी...
क्लास का सबसे बदमाश लड़का रोहन अचानक अपनी कुर्सी से हवा में उठ गया।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसका गला पकड़ रखा हो।
कुछ सेकंड बाद वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
पूरे स्कूल में हड़कंप मच गया।
प्रिंसिपल ने आर्यन को अपने ऑफिस में बुलाया।
आर्यन रोते हुए बोला...
"सर... मैंने कुछ नहीं किया... वो लड़का मेरे साथ घूम रहा है..."
प्रिंसिपल का चेहरा एकदम बदल गया।
उन्होंने तुरंत स्कूल के सबसे पुराने चपरासी को बुलाया।
चपरासी ने डरते हुए बताया...
करीब 18 साल पहले इसी स्कूल में करण नाम का एक बच्चा पढ़ता था।
कुछ बदमाश लड़कों ने उसका बैग छीनकर उसे उसी पुराने लॉकर में बंद कर दिया था।
स्कूल की छुट्टी हो गई...
और किसी को पता ही नहीं चला कि करण अंदर बंद है।
अगली सुबह जब लॉकर खोला गया...
करण की मौत हो चुकी थी।
उस दिन से जो भी बच्चा उस लॉकर के पास अकेला जाता...
करण की आत्मा उसे दिखाई देने लगती।
उसी रात प्रिंसिपल, आर्यन और उसके पापा लॉकर रूम पहुँचे।
जैसे ही उन्होंने आखिरी लॉकर खोला...
पूरा कमरा बर्फ जैसा ठंडा हो गया।
सारे लॉकर अपने आप खुलने और बंद होने लगे।
अचानक करण की आत्मा उनके सामने आ गई।
उसने गुस्से में कहा...
"जिसने मुझे बंद किया... उसे मेरे पास भेजो..."
तभी स्कूल के रिकॉर्ड निकाले गए।
पता चला कि करण को लॉकर में बंद करने वाला लड़का अब बड़ा होकर उसी स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर बन चुका था।
उसे तुरंत वहाँ बुलाया गया।
वह डर के मारे रोने लगा और करण से अपने किए की माफ़ी माँगने लगा।
कुछ पल तक पूरा कमरा शांत रहा।
फिर करण की आत्मा धीरे-धीरे मुस्कुराई...
और धुएँ की तरह गायब हो गई।
उसके बाद उस लॉकर को हमेशा के लिए सील कर दिया गया।
कहते हैं...
आज भी अगर कोई उस बंद लॉकर के पास कान लगाकर सुनता है...
तो अंदर से किसी बच्चे की बहुत धीमी आवाज़ सुनाई देती है—
"मेरा बैग... मिल गया क्या...?"