जादुई पेंसिल
रवि को पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। एक दिन, उसे जंगल में एक चमकती हुई पेंसिल मिली। जब उसने उससे कुछ लिखा, वह सच हो गया!
उसने खूब मज़े किए—खिलौने, मिठाइयाँ, और यहाँ तक कि एक बड़ा घर भी बना लिया। लेकिन जब उसने परीक्षा में बिना सोचे-समझे उत्तर लिखे, तो सब गलत हो गया।
तब उसे समझ आया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं। उसने पेंसिल से सिर्फ अभ्यास किया और कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने लगा।
आख़िरकार, वह कक्षा का सबसे होशियार बच्चा बन गया।
शिक्षा:
जादू से नहीं, मेहनत से सफलता मिलती है!
जादुई पेंसिल
रवि को पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। एक दिन, उसे जंगल में एक चमकती हुई पेंसिल मिली। जब उसने उससे कुछ लिखा, वह सच हो गया!
उसने खूब मज़े किए—खिलौने, मिठाइयाँ, और यहाँ तक कि एक बड़ा घर भी बना लिया। लेकिन जब उसने परीक्षा में बिना सोचे-समझे उत्तर लिखे, तो सब गलत हो गया।
तब उसे समझ आया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं। उसने पेंसिल से सिर्फ अभ्यास किया और कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने लगा।
आख़िरकार, वह कक्षा का सबसे होशियार बच्चा बन गया।
शिक्षा:
जादू से नहीं, मेहनत से सफलता मिलती है!